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THE AUTOPSY OF UNSPENT LOVE
PART III: THE ANATOMY OF "TOO LATE"
Chapter 11: The Unread Message
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आरव वेटिंग रूम में बैठा था। उसका पेट मरोड़ खा रहा था। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने इसे “Functional Dyspepsia” कहा था— एक सभ्य-सा मेडिकल शब्द, जिसका मतलब था: तुम्हारा पेट चीख रहा है, और हमें नहीं पता क्यों। जब भी उसे असहजता होती, वह वही करता जो वह हमेशा करता था— फोन उठा लेता। काला शीशा। आधुनिक बच्चे का पैसिफायर। उसने इंस्टाग्राम खोला। अंगूठा उस लयबद्ध, सम्मोहन वाली चाल में चलने लगा— जिस चाल में एक आधुनिक लत छुपी होती है। स्क्रॉल। डबल टैप। स्क्रॉल। डबल टैप। यह दिमाग को सुन्न करने का तरीका था— एक ऐसा मंत्र, जिससे आदमी एक साथ हर जगह भी रहता है, और कहीं भी नहीं। फिर— अंगूठा रुक गया। फीड पर एक तस्वीर उभरी। रिया। कैफ़े वाली लड़की। “Architect, 5'5, fluently sarcastic” वाली लड़की— जिसे उसने तीन महीने पहले छोड़ दिया था। क्यों? क्योंकि वह अपनी बीमार दादी की बातें करती थी— और वह “too heavy” था उसके वाइब के लिए। तस्वीर ब्लैक-एंड-व्हाइट थी। कैप्शन किसी कॉमन फ्रेंड ने डाला था: “Cannot believe you are gone. The world lost its brightest smile today. Rest in power, Riya. 1999–2024.” आरव स्क्रीन को घूरता रह गया। पिक्सल धुंधले पड़ने लगे—या शायद उसकी आँखें। Gone? वह… चली गई? नहीं। वह नहीं जा सकती। मैंने तो पिछले हफ्ते भी उसके प्रोफाइल पर फिर से स्वाइप लेफ्ट किया था। उसने टैग किया हुआ अकाउंट खोला। वह मेमोरियल पेज था। कमेन्ट्स की बाढ़ थी। “वो सबसे दयालु इंसान थी।” “मेरी थीसिस में मदद के लिए पूरी रात जागी थी।” “उसकी हँसी स्टेडियम भर सकती थी।” आरव बस देखता रह गया— जैसे किसी ने उसके भीतर किसी अदृश्य जगह पर एक ठंडी सुई चुभो दी हो। और पेट… जो अब तक “functional” था— अचानक सच्चा हो गया। क्योंकि कुछ दर्द पेट में नहीं होता। कुछ दर्द— समय के भीतर होता है। और कुछ— अचानक ‘बहुत देर’ हो जाता है।
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