“हम एक exercise करेंगे,” फ़राह ने कहा। “आँखें बंद करो।”
तीनों ने हिचकिचाया—फिर मान गए।
“उस व्यक्ति की कल्पना करो जिससे तुम इस समय सबसे ज़्यादा चिढ़े हुए हो,” फ़राह की आवाज़ नरम थी, पर आदेश जैसी। “वह जो बार-बार टोकता है। जिसकी आवाज़ तुम्हारी नसों पर खरोंच बन जाती है। जिसके लिए तुम प्रेम रोक कर बैठे हो क्योंकि उसने तुम्हारी ‘शर्तें’ पूरी नहीं कीं।”
मीरा को अपने पति का खयाल आया—जो हमेशा गीला तौलिया बिस्तर पर छोड़ देता था।
आरव को अपने पिता का—जो हर रविवार फोन करके उसकी saving के बारे में पूछता था।
“अब,” फ़राह ने कहा, “कल्पना करो कि 3:00 AM पर फोन आता है। और दूसरी तरफ की आवाज़ कहती है—वे अब नहीं रहे। अचानक। विशाल। अपरिवर्तनीय।”
मीरा के माथे पर बल पड़ गया।
आरव का शरीर हल्का-सा झटका।
“आँखें मत खोलो,” फ़राह ने कहा। “उसी कमरे में रहो। उस घर की कल्पना करो जिसमें वे नहीं हैं। गीला तौलिया गायब है। बिस्तर हमेशा के लिए पूरी तरह सूखा है। रविवार का फोन कभी नहीं आता। फोन शांत है। चिढ़ खत्म। तुम्हारे पास ‘परफेक्ट’ शांति है। तुम्हारी ‘परफेक्ट’ जगह है।”
मीरा की बंद पलकों के नीचे से एक आँसू निकल आया।