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THE AUTOPSY OF UNSPENT LOVE
PART IV: THE REHABILITATION
अध्याय 13: लेन-देन तोड़ना
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मयूर विहार के अपार्टमेंट का दरवाज़ा उसी परिचित, खुरदुरी चरमराहट के साथ खुला—जिससे आमतौर पर मीरा के दाँत भींच जाते थे। “मुझे कारपेंटर को कॉल करना है,” वह सामान्यतः सोचती। Efficiency failure. आज, उसने बस उस आवाज़ को सुना। वह एक “टेक्सचर” वाली आवाज़ थी—जैसे घर की सतह पर समय की उंगलियाँ। तीस सालों से यही आवाज़ उसे घर में स्वागत करती आई थी। और एक दिन यह आवाज़ बंद हो जाएगी। “मीरा?” रसोई से माँ की आवाज़ आई—प्रेशर कुकर की सिटी के साथ। “आज जल्दी? रोटियाँ तो बनाई नहीं हैं अभी।” मीरा रसोई में गई। हवा में जले जीरे और पुराने दुःख की गंध घनी थी। उसकी माँ, मिसेज़ तनेजा, चूल्हे के पास खड़ी थीं। आज वे छोटी-सी लग रही थीं। उमस ने उनके रंगे हुए बालों को फुला दिया था और नीचे की सफ़ेद जड़ों को उघाड़ दिया था—उनके बूढ़े होने की टाइमलाइन, जिसे मीरा अक्सर नज़रअंदाज़ करती थी।
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