“बाहर बैठ जा,” माँ ने कलछी हिलाते हुए कहा। “पानी ले आती हूँ। खाया है? तू पतली लग रही है।”
यह एक script था—घर का पुराना, ऑटोमैटिक script।
Step 1: माँ सेवा ऑफर करती है (खाना/पानी)।
Step 2: मीरा सेवा लेते हुए emails चेक करती है।
Step 3: मीरा सेवा की आलोचना करती है (तेल ज़्यादा/नमक ज़्यादा) या सेवा करने वाली की (फटी साड़ी क्यों पहनी है?)।
Step 4: मीरा “dutiful” महसूस करके चली जाती है—और माँ “used” महसूस करके रह जाती है।
आज मीरा हिली नहीं। उसने माँ के पैरों को देखा। वे सूजे हुए थे—घिसी हुई रबर की चप्पलों में ठुंसे हुए, जिनकी एड़ियाँ पतली हो चुकी थीं।
“अगर आज रात माँ चली गईं…” मीरा ने सोचा—डॉ. फ़राह की क्लिनिक वाली visualization उसके भीतर फैलती हुई—“तो मैं ये सूजे हुए पैर फिर कभी नहीं देख पाऊँगी।”