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THE AUTOPSY OF UNSPENT LOVE
PART IV: THE REHABILITATION
अध्याय 13: लेन-देन तोड़ना
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English हिन्दी
“माँ,” मीरा ने कहा। “एक मिनट बेटा, दूध उबल रहा है।” “माँ, रुक जाओ।” मिसेज़ तनेजा ठिठक गईं। वे मुड़ीं—चिंता की लकीरें माथे पर गहरी हो गईं। “क्या हुआ? राहुल तो ठीक है? पति? नौकरी चली गई क्या?” “नहीं,” मीरा ने कहा। वह रसोई में एक कदम और अंदर आई—उस जगह में जहाँ वह आमतौर पर खुद को ग्राहक और माँ को सर्विस-स्टाफ की तरह ट्रीट करती थी। उसने गैस बंद कर दी। सिटी का हिस्स-हिस्स रुक गया। सन्नाटा अचानक और बहुत ऊँचा हो गया। “चलो,” मीरा ने कहा। “पर रोटियाँ…” “रोटियाँ ठंडी हो जाएँगी तो भी चलेगा। चलो।” उसने माँ का हाथ पकड़ा। वह हाथ खुरदुरा था, मेहनत से कड़ा हुआ—और गर्म। मीरा माँ को डाइनिंग टेबल तक ले गई और कुर्सी खींचकर बोली, “बैठो।” मिसेज़ तनेजा बैठ गईं, जैसे डर गई हों। भारतीय घरों में जब बीच दोपहर एक बिज़ी corporate बेटी माँ को बैठने के लिए कहे, तो अक्सर मतलब होता है—बुरी खबर।
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