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THE AUTOPSY OF UNSPENT LOVE
PART IV: THE REHABILITATION
अध्याय 13: लेन-देन तोड़ना
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English हिन्दी
“मुझे ये… घबराहट होती रहती है,” मिसेज़ तनेजा ने छाती पर हाथ रखते हुए फुसफुसाया। घबराहट। उत्तर भारत का वह लगभग “अअनुवादनीय” शब्द—जिसमें anxiety, palpitations, बेचैनी और किसी अनहोनी का डर सब एक साथ घुल जाते हैं। पहले, जब माँ यह कहती थीं, मीरा आँखें घुमा देती—“डाइजीन ले लो माँ, गैस है बस।” या फिर हार्डवेयर “ठीक” करने के लिए कार्डियोलॉजिस्ट का अपॉइंटमेंट बना देती—software को पूरी तरह अनदेखा करके। मीरा माँ के सामने बैठ गई। उसने न गोली ऑफर की। न डॉक्टर। “बताओ,” मीरा ने कहा। “कहाँ दर्द होता है?” माँ चौंकी। “ऐसे… भारी लगता है। यहाँ।” उसने स्टर्नम रगड़ा। “जैसे अंदर कोई चिड़िया फड़फड़ा रही हो। फोन बजता है तो डर लगता है। लगता है… कहीं तुझे कुछ हो गया तो?”
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