यही था Identity Crisis का core।
Brahma Kumaris philosophy के अनुसार मानव दुख की जड़ है Body Consciousness (Deh Abhiman)। हम “Self” को शरीर से जोड़ देते हैं—चेहरा, नौकरी, उम्र, रोल। हम सोचते हैं: “I am a CEO,” “He is an old man,” “She is a wife.”
और जब हम सिर्फ “Body” देखते हैं, तो हम उसे judge करने लगते हैं। हम उस पर conditions लगाते हैं।
“मैं तुम्हें तब प्यार करूँगा जब तुम good दिखोगे।”
“मैं तुम्हें तब प्यार करूँगा जब तुम ज़्यादा कमाओगे।”
“मैं तुम्हें तब प्यार करूँगा जब तुम इतनी तेज़ खाँसी बंद कर दोगे।”
“मैंने उन्हें फर्नीचर की तरह treat किया,” कबीर ने फुसफुसाकर कहा। “उनकी धीमी चाल, काँपते हाथ—और मुझे irritation होती थी। मैंने उन्हें… ‘Him’ नहीं देखा। मैंने सिर्फ एक malfunctioning machine देखी।”