“तो solution क्या है?” कबीर ने पूछा—आवाज़ में फिर से desperation उतर रही थी। “क्या हम शरीर को ignore कर दें? ascetic बन जाएँ? क्या मुझे उनकी health, उनकी needs को ignore कर देना चाहिए था क्योंकि वे ‘just a soul’ हैं?”
“नहीं,” शुक्ला मास्टर मुस्कुराए। “वह दूसरा extreme है। वही Spiritual Bypassing। तुम car को ignore नहीं कर सकते। car breakdown हो जाए तो driver अपनी journey पूरी नहीं कर पाएगा।”
वे थोड़ा आगे झुके। “Middle Path (Yukta Vihara) follow करना होता है। गीता अध्याय 6, श्लोक 17 कहती है: ‘Yuktahara-viharasya…’—योग उसके लिए नहीं जो बहुत ज़्यादा खाता है या बहुत कम, और न उसके लिए जो बहुत ज़्यादा सोता है या बहुत कम।”
“इसे love पर कैसे apply करूँ?”
“Body को respect दो—क्योंकि वह Soul का Temple है। उसे खाना दो, कपड़े दो, देखभाल करो। लेकिन उसे worship मत करो। और Temple की हालत देखकर Soul को judge मत करो।”
शुक्ला मास्टर ने शॉल उठाई और बहुत सलीके से मोड़ दी।
“जब तुम्हारे पिता जीवित थे, Middle Path यह होता: शरीर के लिए दवा ले आते (costume की care), लेकिन उनके पास बैठकर उनका दिन पूछते (soul से connection)। खाँसी को ignore नहीं करते, पर खाँसी को उनकी identity भी नहीं बनने देते। तुम costume के पार actor को देखते।”
कबीर ने आँखें बंद कीं। उसे फिर फल की प्लेट की छवि दिखी।
उसे समझ आया—वह दोनों जगह फेल हुआ था। उसने costume की care भी ठीक से नहीं की (health को ignore किया), और soul से connect तो बिल्कुल नहीं किया।
“दुख का infection,” शुक्ला मास्टर ने नरम आवाज़ में कहा, “इसलिए फैलता है क्योंकि हम सब masks के साथ interact कर रहे हैं। हम मंच पर actor हैं—और भूल गए हैं कि हम अभिनय कर रहे हैं। हम script को बहुत seriously ले लेते हैं—‘उसने मुझे insult किया।’ ‘उसने call नहीं किया।’ यह सब drama का dialogue है। Soul untouched रहती है।”
“मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि अब मैं जानता हूँ वे कौन थे,” कबीर ने कहा, आँसू गिरते हुए। “स्वेटर वाला बूढ़ा आदमी नहीं… बल्कि आँखों के पीछे की रोशनी।”
“तो कहो,” शुक्ला मास्टर बोले। “लेकिन उससे भी ज़्यादा—living को कहो। ऑफिस जाओ। अपने employees को देखो। ‘Project Managers’ या ‘Interns’ मत देखो। Souls को देखो जो role निभा रही हैं। Uniform नहीं—Driver को देखो। अगर तुम यह करोगे, तो तुम्हें फिर कभी ‘Alas’ नहीं कहना पड़ेगा।”
कबीर खड़ा हुआ। उसने “Good” कपड़े—रेशमी कुर्ते—उठाए।
“मैं इन्हें donate कर दूँगा,” उसने कहा। “किसी और को अपने नाटक के लिए costume चाहिए होगा।”
उसने ग्रे शॉल रख ली। शरीर की relic की तरह नहीं—बल्कि उस गलती की याद के रूप में जिसे वह फिर कभी नहीं करेगा: wrapping paper को gift समझ लेने की गलती।
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Key Concepts Covered in Narrative:
1. Body Consciousness (Deh Abhiman)।
2. Soul Consciousness (Dehi Abhiman)।
3. Costume Metaphor (Vasamsi Jirnani)।
4. Middle Path (Yukta Vihara)।
THE AUTOPSY OF UNSPENT LOVE
PART IV: THE REHABILITATION
अध्याय 16: कॉस्ट्यूम पार्टी
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समाप्ति (वैकल्पिक)
आप चाहें तो इस अध्याय को “Completed” मार्क कर सकते हैं। यह वैकल्पिक है।
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