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THE AUTOPSY OF UNSPENT LOVE
PART IV: THE REHABILITATION
अध्याय 19: जड़ें बोलती नहीं
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“उसने कभी कहा नहीं।” कबीर क्लिनिक की छत पर बैठा था। सूरज डूब रहा था और नोएडा का smog नीले-गहरे बैंगनी घाव-सा दिख रहा था। उसके हाथ में ठंडी कॉफी थी और वह नीचे ट्रैफ़िक को घूर रहा था। “उसने कभी ‘I love you’ नहीं कहा,” कबीर ने शुक्ला मास्टर की ओर देखते हुए दोहराया। “एक बार भी नहीं। बत्तीस साल। मैंने उसके bills दिए, उसके लिए car खरीदी, उसी घर में रहा। लेकिन उसने कभी आँखों में देखकर वो शब्द नहीं बोले। क्यों? क्या मैं enough नहीं था?” शुक्ला मास्टर प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठा मूँगफली छील रहा था। उसने एक छिलका उस गिलहरी की ओर उछाल दिया जो मुंडेर पर बैठी उसे घूर रही थी।
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