“क्या तुम अपनी left hand से कहते हो ‘I love you’?” शुक्ला मास्टर ने पूछा।
कबीर ने भौंहें सिकोड़ लीं। “क्या?”
“तुम्हारी left hand,” शुक्ला मास्टर ने इशारा किया। “क्या तुम सुबह उठकर अपने हाथ को देखकर कहते हो—‘I love you, hand’? क्या तुम उसे धन्यवाद देते हो कि उसने तुम्हारा फोन पकड़ा? क्या तुम उस पर कविता लिखते हो?”
“नहीं,” कबीर चिढ़कर बोला। “ये तो पागलपन होगा। ये मेरा हाथ है। मेरा ही हिस्सा है।”
“Exactly,” शुक्ला मास्टर ने मूँगफली तोड़ते हुए मुस्कुराकर कहा। “हमारी संस्कृति में, बेटा, हम ‘I love you’ इसलिए नहीं कहते क्योंकि इसे कहने के लिए दो लोग चाहिए। एक ‘I’ और एक ‘You’। separation चाहिए। distance चाहिए।”