वह आगे झुका, आवाज़ फुसफुसाहट में उतर गई। “तुम्हारे पिता ने नहीं कहा क्योंकि वह तुम्हें ‘other’ नहीं समझते थे। पश्चिम में प्रेम दो व्यक्तियों के बीच contract है—मैं affection दूँ, तुम validation दो—यह transactional है। लेकिन यहाँ? यहाँ आदर्श है Advaita—Non-duality—दो शरीरों में एक ही आत्मा।”
कबीर चुप हो गया। उसे noise-cancelling headphones याद आए। बंद दरवाज़ा याद आया। दूरी मैंने बनाई थी, उसे समझ आया। मैंने ‘You’ बनाया ताकि मैं उसे manage कर सकूँ।
“हम फूल के दीवाने हैं,” शुक्ला मास्टर ने कोने में रखे गेंदा के गमले की ओर इशारा करते हुए कहा। “हमें romance का फूल चाहिए—bright रंग, sweet खुशबू, Instagram caption। हमें शब्द सुनने हैं क्योंकि शब्द रिश्ते के फूल हैं। लेकिन फूल एक दिन में मुरझा जाते हैं।”