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अनकहे प्रेम की पोस्टमार्टम रिपोर्ट
एक क्लिनिकल रिपोर्ट: हम देर होने तक क्यों टालते रहते हैं
भाग 1: जीवित भूत
अध्याय 2: इंसानी शॉपिंग कार्ट
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आरव लोगों को देखता नहीं था; वह उन्हें स्कैन करता था। वह ग्रेटर कैलाश-II के “द थर्ड वेव” में बैठा था—यह जगह उसने खास रोशनी के लिए चुनी थी: गर्म एंबर लाइट, पोर्स को माफ़ करने वाली, स्टोरीज़ के लिए परफेक्ट। सामने रिया बैठी थी। बम्बल प्रोफाइल के अनुसार—“24, आर्किटेक्ट, 5’6”, सार्कैज़्म में फ्लूएंट।” असल में आरव ने ठंडे क्लिनिकल ढंग से नोट किया: करीब 5’5”, आँखों के आसपास थकान, और “सार्कैज़्म” अधिकतर दिल्ली ट्रैफिक की शिकायतें। डेटा मिसमैच। प्रोडक्ट डिस्क्रिप्शन गलत। रिया माचा लट्टे को घुमाती हुई बोली, “दादी बहुत बीमार हैं। वीकेंड अस्पतालों में निकल जाते हैं। बहुत थक जाती हूँ। और… अभी यहाँ बैठकर भी गिल्ट हो रहा है।” आरव ने ‘एक्टिव लिसनिंग’ वाला चेहरा बनाया—हल्का झुकाव, भौंहों में नकली संवेदना। भीतर उसे एक ‘खुजली’ महसूस हुई। वह खुजली उसकी दाहिनी जांघ में थी, वहीं जहाँ iPhone रखा था। आँकड़ों के अनुसार उसके कम-से-कम तीन दूसरे मैच पेंडिंग थे। शायद कोई ऐसा मैच जो पहली डेट पर बीमार रिश्तेदारों की बात न करे। शायद “अपग्रेड।” यह इंसानी कनेक्शन को शॉपिंग कार्ट बना देना था—तुलना, मूल्यांकन, बदल देना। और आरव हमेशा तुलना करता था।
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