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अनकहे प्रेम की पोस्टमार्टम रिपोर्ट
एक क्लिनिकल रिपोर्ट: हम देर होने तक क्यों टालते रहते हैं
भाग 1: जीवित भूत
अध्याय 2: इंसानी शॉपिंग कार्ट
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उनके बीच खामोशी खिंच गई। एक सामान्य इंसान उस ‘मिस्ड कनेक्शन’ की अजीबता महसूस करता। आरव ने बस डोपामिन-विथड्रॉअल महसूस किया—नया स्टिम्युलस चाहिए। “एक मिनट,” वह उठकर बोला। “वॉशरूम।” उसने दरवाज़ा लॉक किया और तुरंत फोन निकाल लिया। स्क्रीन जली—जैसे अनंत ‘बुफे’ का पोर्टल। स्वाइप लेफ्ट: बहुत मेकअप। स्वाइप लेफ्ट: “सीरियस चाहिए”—जोखिम। स्वाइप राइट: मॉडल, ट्रैवल पसंद—परफेक्ट स्पेक्स। मैच। डोपामिन उसके भीतर घंटी की तरह बजा। डिंग: तुम डिज़ायरेबल हो। तुम्हारे पास ऑप्शन्स हैं। तुम जीत रहे हो। वह नई मैच की फोटो देखता रहा—पिक्सल-परफेक्ट, दर्द-रहित। न बीमार दादी, न थकी आँखें। वह बस एक इमेज थी—एक “इट” जो कभी मौजूद रहने की मांग नहीं करेगी। आईने में, एक सेकंड के लिए, उसने अपनी आँखों की खालीपन देखा—जैसे सुपरमार्केट में भूखा आदमी, चारों ओर खाना, पर स्वाद शून्य। मुझे वापस जाना चाहिए, उसने सोचा। दादी के बारे में पूछूँ। असली बनूँ। फोन फिर बजा। “Hey handsome ;)” और बीमारी ने स्टेयरिंग पकड़ ली।
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