उसे याद आया कि रिया की उसके पास बस एक ही तस्वीर थी—memorial page वाली—स्थिर, जमी हुई। पर रिया का एहसास—उसकी खामोशी का भार, उसके भीतर छिपी संभावना की गर्माहट—वह रिकॉर्ड नहीं थी। वह उसके अंदर थी।
उसे समझ आया कि जैसे ही वह पल को capture करेगा, वह पल से बाहर निकल जाएगा। वह एक subject (वह स्वयं) और एक object (sunset) बना देगा—और connection कट जाएगी। यही Duality है।
“जड़ें बोलती नहीं,” शुक्ला मास्टर ने कहा था। और जड़ें selfies तो बिल्कुल नहीं लेतीं।
आरव ने फोन नीचे कर दिया। उसने उसे जेब में रख लिया।
वह बस वहीं खड़ा रहा—नमी भरी हवा में सांस लेता हुआ एक आदमी। उसने एक फ्लेमिंगो को उड़ते देखा—उसके पंख पानी को चीरते गए। उसने उसे रिकॉर्ड नहीं किया। उसने उस दृश्य को अपनी आंखों की रेटिना पर, बिना filter के, जला लिया। वह खतरनाक-सा लगा। वह एक रहस्य-सा लगा।
सालों बाद पहली बार, वह content creator नहीं था। वह witness था।