कबीर मंदिर में था। कोई बड़ा fancy मंदिर नहीं जहाँ नेता जाते हों—बल्कि ऑफिस के पीछे एक छोटा हनुमान मंदिर।
वह झाड़ू लगा रहा था।
उसने suit की पैंट ऊपर मोड़ रखी थी। हाथ में झाड़ू थी। वह धूल और सूखे फूल बुहार रहा था।
वह यह NGO photo op के लिए नहीं कर रहा था। उसने PR team को नहीं बताया। उसने किसी को नहीं बताया।
वह कर रहा था क्योंकि उसके पिता करते थे।
हर मंगलवार, उसके पिता मंदिर का आँगन बुहारते थे। कबीर को यह शर्मनाक लगता था। “Dad, हमारे पास servants हैं। आप janitor जैसा क्यों कर रहे हैं?”
“फर्श साफ होता है, कबीर,” पिता कहते थे। “पर असल में ego साफ होता है।”
अब कबीर समझ गया था।
धूल बुहारते हुए उसे “I am the CEO” वाली भारी, घुटन भरी परत पिघलती महसूस हुई। यहाँ वह “Main Character” नहीं था। वह बस दो हाथ था—एक उद्देश्य के लिए।
उसने rival firm के एक colleague को मंदिर के गेट से गुजरते देखा। पुराना कबीर छिप जाता या “management inspection” का नाटक करता।
नया कबीर बस झाड़ू लगाता रहा।
उसे colleague की समझ नहीं चाहिए थी। उसे दुनिया की approval नहीं चाहिए थी।
वह अपनी जड़ों की देखभाल कर रहा था। और जड़ें सबसे अच्छा अँधेरे में बढ़ती हैं—spotlight की चमक से दूर।
उस रात, group WhatsApp chat असामान्य रूप से शांत था।
मीरा ने Lego tower की फोटो पोस्ट नहीं की।
आरव ने sunset का reel पोस्ट नहीं किया।
कबीर ने humility पर quote पोस्ट नहीं किया।
वे सब ऐसे पल जी रहे थे जो cloud पर upload करने के लिए बहुत भारी, बहुत कीमती, और बहुत असली थे। वे आखिरकार धरती पर मौजूद थे।
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Key Concepts Covered in Narrative:
1. रिश्तों में Observer Effect।
2. Secret Seva (Gupt Daan)।
3. “Reel” बनाम “Real”।
4. Privacy as Nourishment (गोपनीयता = पोषण)।
THE AUTOPSY OF UNSPENT LOVE
PART IV: THE REHABILITATION
अध्याय 20: वह अनपोस्टेड पल
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समाप्ति (वैकल्पिक)
आप चाहें तो इस अध्याय को “Completed” मार्क कर सकते हैं। यह वैकल्पिक है।
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