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THE AUTOPSY OF UNSPENT LOVE
PART IV: THE REHABILITATION
अध्याय 21: बिल्ली की तीर्थ-यात्रा
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आरव के फोन पर नोटिफिकेशन आया। यह कोई match नहीं था। यह एक screenshot था। उसके "Bros" में से किसी ने—high-functioning alcoholics का एक समूह जिन्हें वह दोस्त कहता था—उनके WhatsApp group में एक तस्वीर भेजी थी। तस्वीर में आरव गुरुद्वारे के फर्श पर बैठा था और लंगर में बर्तन धो रहा था। किसी ने चुपके से फोटो खींच ली थी। कैप्शन था: "सौ चूहे खाके बिल्ली हज को चली।" (सौ गलतियाँ करके अब तीर्थ-यात्रा का नाटक।) उसके बाद हँसते हुए emojis की बौछार। "Bro, सब ठीक है? दिवालिया हो गया क्या?" "देखो इसे, संत बन रहा है। पिछले हफ्ते क्लब में था, आज चम्मच धो रहा है।" "Repentance arc loading... 😂" आरव स्क्रीन को घूरता रहा। उसका चेहरा जलने लगा। मुहावरा सीधा दिल में लगा। यह पाखंडी पर भारत का क्लासिक तंज है—गुनाहगार जो अचानक धार्मिक बनने का अभिनय करे। उसके दोस्तों के लिए "Dating App King" से "Community Server" बनना विकास नहीं था; मज़ाक था। performance था। उसके भीतर पुरानी आदत जागी—defend करने की। मैं नकली नहीं हूँ, वह टाइप करना चाहता था। मैं बस खालीपन से थक गया हूँ। पर उसकी उँगलियाँ रुक गईं।
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