🟢 WhatsApp Help
THE AUTOPSY OF UNSPENT LOVE
PART IV: THE REHABILITATION
अध्याय 21: बिल्ली की तीर्थ-यात्रा
पेज 4 / 6
English हिन्दी
"तुम नाटक नहीं कर रहे," शुक्ला मास्टर ने सख्ती से कहा। "तुम Remember कर रहे हो।" उन्होंने अपनी छाती पर हल्का-सा थपका दिया। "यह संस्कृति… यह संस्कार… किताब से सीखा हुआ नहीं है। यह तुम्हारी कोशिकाओं में है। तुम्हारे DNA में है। भारत तुम्हारी mitochondria में रहता है। वर्षों तक तुमने उस पर पश्चिम की धूल चढ़ाई—individualism, transaction, ego। अब धूल साफ हो रही है। तुम कोई बिल्ली नहीं जो तीर्थयात्री बनने का अभिनय कर रही हो। तुम तीर्थयात्री हो जिसने आखिरकार समझा कि वह कभी बिल्ली था ही नहीं।" "लेकिन मज़ाक..." आरव ने धीरे से कहा। "उन्हें मज़ाक करने दो," शुक्ला मास्टर बोले। "बिल्ली हज पर चूहों को impress करने नहीं जाती, अपनी आत्मा को बचाने जाती है। चूहों को चीं-चीं करने दो।"
Machine-ID: 56add13a9fb09aa61cca9a25903efe94