क्लिनिक में Dr. Farah एक नए तरह के मरीज देख रही थीं।
वे दवाओं के लिए नहीं आ रहे थे। वे अनुमति (permission) लेने आ रहे थे।
"मुझे लगता है मैं पागल हो रहा/रही हूँ," एक युवा मेडिकल स्टूडेंट ने कहा। "मैं अब compete नहीं करना चाहता/चाहती। अगर topper बनने का मतलब दादी को ignore करना है, तो मैं topper नहीं बनना चाहता/चाहती। क्या यह गलत है? क्या मेरी ambition खत्म हो रही है?"
"नहीं," Dr. Farah ने पर्चे पर लिखते हुए कहा। "तुम अपना sanity खोज रहे/रही हो।"
उन्होंने Cellular Memory का विचार समझाया।
"मान लो तुम्हारा DNA एक library है," उन्होंने कहा। "पिछले बीस साल से तुम 'Western Individualism' सेक्शन की किताबें पढ़ रहे/रही हो—'Me first.' 'My boundaries.' 'My success.' पर तुम्हारी कोशिकाओं की mitochondria में, एक पुराना सेक्शन भी है—Indian section। वह कहता है: 'Vasudhaiva Kutumbakam'—पूरा संसार एक परिवार है। वह कहता है: 'Seva Paramo Dharma'—सेवा सर्वोच्च धर्म है।"
वे आगे झुकीं। "तुम्हारी anxiety कोई बीमारी नहीं। यह तुम्हारी कोशिकाओं का foreign virus को reject करना है—'I' का virus। तुम्हारा शरीर 'We' होना याद करता है। वह तुम्हारे catch up करने का इंतजार कर रहा है।"