दृश्य 5: वह स्वीकारोक्ति जिसे कोई कहना नहीं चाहता था
एक शाम, लंबे दिन के बाद, चारों क्लिनिक की सीढ़ियों पर बैठे।
“हम युवाओं को ठीक करना चाहते थे,” फ़राह ने कहा। “लेकिन जो हम वास्तव में कर रहे हैं, वह है वयस्कता को ठीक करना।”
“हमारे बच्चे टूटे हुए नहीं हैं,” मीरा ने कहा। “वे एक असामान्य वातावरण पर सामान्य प्रतिक्रिया दे रहे हैं।”
आरव ने देखा कि उनकी क्लिप्स ऐसे लोग भी री-शेयर कर रहे थे जिन्हें वह कभी हल्का समझता था।
एक जिम-इन्फ्लुएंसर अपनी दादी को अपने हाथों से खाना खिला रहा था।
कैप्शन: “जब जीवन है—तब प्रेम करो।”
“यह फैल रहा है,” आरव ने धीमे से कहा।
शuk्ला मास्टर ने नीम की पत्तियों की ओर देखा।
“सच चुपचाप फैलता है,” उन्होंने कहा। “पर जब फैलता है, तो जड़ों की तरह फैलता है—हर चीज़ के नीचे।”
कबीर का फ़ोन बजा। माँ का संदेश था:
“बेटा, तुम्हारा वीडियो तुम्हारी बुआ ने देखा। वह दस साल बाद अपने भाई से मिलने जाना चाहती है। कह रही है—अब उसके अंतिम संस्कार का इंतज़ार नहीं करेगी।”
कबीर ने आँखें बंद कर लीं।
वही थी लहर।
ना व्यूज़।
ना वायरलिटी।
बस टालना बंद करने का एक निर्णय।