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अनकहे प्रेम की पोस्टमार्टम रिपोर्ट
एक क्लिनिकल रिपोर्ट: हम देर होने तक क्यों टालते रहते हैं
भाग 1: जीवित भूत
अध्याय 3: स्नेह की शर्तें
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“हाँ, हाँ,” माँ तुरंत पीछे हट गई। “तू बहुत मेहनत करती है। मैं बस… मैंने गाजर का हलवा बनाया है। खाएगी?” मीरा ने लंबी, भारी साँस छोड़ी—जैसे दुनिया का बोझ वही उठाए हुए है। उसकी थकान उसके लिए मेडल थी। अगर वह तनाव में नहीं होती, तो उसे लगता कि वह पर्याप्त नहीं कर रही। और क्योंकि वह तनाव में थी, उसे लगता कि वह बुनियादी नरमी/दया से मुक्त है। “माँ, मैंने कहा था मैं इंटरमिटेंट फास्टिंग कर रही हूँ,” वह झटके से बोली, आखिरकार नज़र उठाते हुए। “और शुगर से माइग्रेन ट्रिगर होता है। आप हर बार भूल क्यों जाती हैं?” माँ ने टेबल पर रखे नारंगी हलवे को देखा। “मैंने बस सोचा… तुम्हें पसंद था।” “तब मैं बारह साल की थी,” मीरा ने कहा। “अब मैं पैंतीस की हूँ। मेरे ऊपर मॉर्गेज है, पति डायबिटिक है, और बॉस आधी रात को ईमेल करता है। मेरे पास हलवे का समय नहीं है।” कमरे में चुप्पी फैल गई। एसी की आवाज़ फ्रेम में हल्की खड़खड़ाहट के साथ चल रही थी। मीरा के भीतर चिढ़ उठी। वह मुझे हर बार ‘बैड गाय’ क्यों बनाती है? उसने माँ के सफेद होते बालों की जड़ें देखीं जिन्हें डाई चाहिए थी, और चश्मा जो थोड़ा टेढ़ा था। माँ अब एक “प्रोजेक्ट” बन चुकी थी—मैनेज करने वाला। हर रविवार: बिजली का बिल, 1mg से दवाइयाँ, मेड को धूल के निर्देश। कागज़ पर वह “अच्छी बेटी” थी। उसने प्रेम का श्रम किया। और प्रेम रोक लिया।
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