यह ट्रांज़ैक्शनल रिगार्ड था। मीरा की अंदरूनी लेज़र-बुक कभी बंद नहीं होती थी।
डेबिट: मैं 45 मिनट ड्राइव करके आई।
डेबिट: मैंने मोतियाबिंद की सर्जरी का खर्च दिया।
क्रेडिट: आप मुझे बोर कर रही हैं।
बैलेंस: मुझे रूखा होने का हक है।
“ठीक है,” माँ ने धीमे से कहा। “मैं राहुल के लिए पैक कर दूँगी। शायद वह खा ले।”
“ठीक।” मीरा खड़ी हो गई। जेब में एक ‘फैंटम’ वाइब्रेशन—जैसे फोन बुला रहा हो।
“मुझे जाना है। 12 बजे मेड आ जाएगी।”
“अभी?” माँ का चेहरा गिर गया—एक सूक्ष्म सा टूटना, जिसे मीरा के पास समझने का समय नहीं था। “पर तू तो अभी आई। मैं तुम्हें—”
“माँ, प्लीज़,” मीरा ने काट दिया। “गिल्ट ट्रिप मत शुरू करो। मैं जितना कर सकती हूँ, कर रही हूँ। तुम्हें पता है मेरी उम्र की कितनी महिलाएँ हर हफ्ते अपने माता-पिता से मिलने आती हैं? कोई नहीं। तुम्हें खुश होना चाहिए कि मैं आती हूँ।”
उसने अपनी मौजूदगी को हथियार बना लिया—जैसे सब्सक्रिप्शन रिन्यूअल: मैंने आकर ‘पेमेंट’ कर दिया, अब संतुष्ट रहो।
माँ उसे दरवाज़े तक छोड़ने आई। हाथ बढ़ा—शायद मीरा की बाँह छूने के लिए, शायद बालों की लट ठीक करने के लिए।
मीरा झटके से पीछे हट गई, घड़ी देखते हुए।
“दरवाज़े का ध्यान रखना,” मीरा ने आदेश दिया। “ठीक से लॉक करना। क्राइम रेट बढ़ गया है।”