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अनकहे प्रेम की पोस्टमार्टम रिपोर्ट
एक क्लिनिकल रिपोर्ट: हम देर होने तक क्यों टालते रहते हैं
भाग 1: जीवित भूत
अध्याय 3: स्नेह की शर्तें
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English हिन्दी
“मीरा,” माँ ने दरवाज़े पर रुककर कहा। “क्या?” “तू बहुत थकी लग रही है।” मीरा हँसी—सूखी, कठोर। “मैं थकी हूँ, माँ। दुनिया चलाने वालों के साथ यही होता है।” माँ ने फुसफुसाया, “थोड़ा आराम कर ले। तेरे बिना भी दुनिया घूमती रहेगी।” मीरा ने आँखें घुमा दीं। बूढ़ों की बातें। “बाय, माँ।” वह बिना पीछे देखे लिफ्ट की ओर चल पड़ी। उसने माँ को दरवाज़े के चौखट पर टिककर देखते नहीं देखा। उसने यह नहीं देखा कि माँ का हाथ लैच पर थोड़ा देर रुका—जैसे जाती हुई गर्मी को पकड़ना चाहती हो। कार में मीरा ने एड्रेनालिन को राहत समझ लिया। उसने “Optimizing Workflow” वाला पॉडकास्ट तेज़ कर दिया ताकि चुप्पी दब जाए। उसने अपने आप को वही झूठ सुनाया जो उसे बीमार रखता था: मैं अच्छी बेटी हूँ। मैं प्रदान करती हूँ। मैं आती हूँ। इतना काफ़ी है। प्रेम एक चेकलिस्ट बन गया था: मैं आई। मैंने पे किया। मैंने ठीक किया। एक लाइन गायब थी: मैंने जुड़ाव बनाया।
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