डॉ. फ़राह किसी ब्रॉशर वाली डॉक्टर जैसी नहीं दिखती थीं। बाल बिखरे थे, पेंसिल से बाँधे हुए।
उन्होंने वेटिंग रूम को देखा—चिंतित आत्माओं का एक एक्वेरियम।
कबीर सीना पकड़े।
मीरा घड़ी देखती।
आरव नीली रोशनी में डूबा।
डॉ. फ़राह ने एक लंबी साँस ली।
उन्हें रिपोर्ट्स छपने से पहले ही पता थीं।
कबीर का ECG नॉर्मल होगा।
मीरा का MRI क्लीन होगा।
आरव की एंडोस्कोपी में हल्की सूजन—बस इतना।
वह इसे “Diagnostic Mirage” कहती थीं।
लोग ट्यूमर, ब्लॉकेज, फ्रैक्चर—कुछ भी ठोस—की उम्मीद लेकर आते हैं।
क्योंकि अगर वह जैविक है, तो आप उसे काट सकते हैं।
पर आप अर्थ से खाली जीवन का ऑपरेशन नहीं कर सकते।
आप माता-पिता को फर्नीचर की तरह ट्रीट करने के अपराधबोध के लिए एंटीबायोटिक नहीं लिख सकते।
“Mr. Kabir?” उन्होंने पुकारा।
कबीर चौंका। खड़ा हुआ। ब्लेज़र सीधा किया। और उनकी तरफ चला—फैसले के लिए तैयार, एक “ट्रेजिक हीरो” बनने के लिए तैयार।