🟢 WhatsApp Help
अनकहे प्रेम का पोस्टमार्टम
एक क्लिनिकल रिपोर्ट: हम देर होने तक क्यों टालते रहते हैं
भाग 2: अचानक खामोशी
अध्याय 5: अनुत्तरित कॉल
पेज 3 / 5
English हिन्दी
बीस मिनट बाद कबीर कॉन्फ़्रेंस रूम से बाहर निकला—जैसे दस फ़ीट लंबा हो गया हो। फंडिंग पक्की। देहरादून वाला घर। फुल-टाइम नर्स। अच्छा बेटा—कल से। उसने टाई ढीली की और पिता को कॉल करने के लिए फोन निकाला। वह खबर बाँटना चाहता था: “पापा, हो गया।” स्क्रीन जली। 4 Missed Calls: Dad. 1 Missed Call: Landline. 1 Missed Call: Security Guard. लिफ्ट के दरवाज़े खुले—पर कबीर ने कदम नहीं बढ़ाया। डोपामिन हवा हो गया। पेट में कुछ ठंडा, भारी—सीसा जैसा—उतर गया। उसने पिता को डायल किया। Ring… Ring… Ring… कोई जवाब नहीं। उसने लैंडलाइन मिलाई। Ring… Ring… “Hello?” यह पिता की आवाज़ नहीं थी। कठोर, हड़बड़ाई हुई आवाज़। “पापा?” कबीर ने पूछा—आवाज़ काँप रही थी। “क्या आप मिस्टर कबीर हैं?” सामने वाले ने कहा। “मैं इमरान… सिक्योरिटी।” “हाँ। पापा को दीजिए।” एक विराम—बहुत लंबा। “साहब… आपने कॉल नहीं उठाया। हमने कोशिश की। वो गिर गए। किचन में। हमने दरवाज़ा तोड़ा, लेकिन…” वाक्य टूट गया। और उसी के साथ कबीर की दुनिया भी।
Machine-ID: c1c436e75ec5798a2c1aabb0c412a699