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अनकहे प्रेम का पोस्टमार्टम
एक क्लिनिकल रिपोर्ट: हम देर होने तक क्यों टालते रहते हैं
भाग 2: अचानक खामोशी
अध्याय 6: अनुपस्थिति की जीवविज्ञान
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कमरे में पुराने काग़ज़ और इलायची की गंध थी। बिस्तर “मिलिट्री-टाइट” बना था। पिता अनुशासन वाले आदमी थे। बेडसाइड टेबल पर मोटे फ्रेम वाला चश्मा—सलीके से मोड़ा हुआ। पास ही Telma-40 की स्ट्रिप। एक गोली गायब। वे कल भी यहाँ रहने की योजना बना रहे थे। सप्ताह भर की दवा खरीदी थी। यही वस्तुओं की क्रूरता है। वे लोगों से ज़्यादा जीती हैं। चश्मा यहाँ है—मज़बूत, उपयोगी। पर जिन आँखों ने उसमें से देखा—वे अब राख हैं। दवा यहाँ है—रसायन के स्तर पर प्रभावी। पर जिस दिल को बचाना था—वह रुक चुका है। कबीर बिस्तर के किनारे बैठ गया। उसने तकिया उठाया और चेहरा उसमें दबा दिया। उसने साँस ली। और फिर “हम” ढह गया। करीबी रिश्तों में नर्वस सिस्टम co-regulate करता है। हम आराम, स्थिरता—दूसरे पर ऑफ़लोड करते हैं। प्रियजन हमारे लिए external hard drive बन जाते हैं। जब वे मरते हैं, तो यह सिर्फ़ “किसी और” का जाना नहीं होता। यह अपने-आप का सिस्टम-फेलियर होता है। कबीर को सीने में phantom limb जैसा एहसास हुआ। उसका हाथ फोन की तरफ गया—किसी को कॉल करने के लिए, किसी को भी। पर किसे? पिता ही तो emergency contact थे। लूप टूट चुका था।
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