डॉ. फ़राह नक़वी अपनी लेदर स्विवेल चेयर पर बैठी थीं। केबिन में बस एयर कंडीशनर की हल्की गूँज थी। टेबल पर कबीर की फ़ाइल रखी थी।
Diagnosis: Acute Grief Reaction. Anxiety Disorder. Somatic Symptom Disorder.
उन्होंने पेन उठाया—प्रिस्क्रिप्शन लिखने के लिए: Clonazepam 0.5mg SOS. Sertraline 50mg.
फिर रुक गईं।
स्याही काग़ज़ में फैल गई—एक छोटा-सा काला Rorschach। दवाएँ कबीर को नींद दे देंगी, कॉर्टिसोल घटा देंगी, घबराहट को सुन्न कर देंगी।
पर वे उसके ब्रह्मांड के छेद को नहीं भरेंगी।
उन्हें यह इसलिए पता था क्योंकि वे खुद वही दवाएँ ले रही थीं।
सात साल पहले फ़राह एक अलग इंसान थीं। वे सिर्फ़ मनोचिकित्सक नहीं थीं—वे “प्रोजेक्ट मैनेजर” थीं।
उनका प्रोजेक्ट था—उनके पति, रोहन।
रोहन नरम-सा आदमी था। एक कलाकार—जो ऐसे लैंडस्केप बनाता था जिन्हें कोई नहीं खरीदता। वह घंटों बालकनी में बैठ सकता था, ठंडी हो चुकी चाय पीते हुए, कबूतर देखते हुए। वह दयालु था। उपस्थित था।
और बेहद “अन-अम्बिशस।”
फ़राह उसे प्यार करती थीं—पर शर्तों के साथ।
उनका प्यार एक if-then एल्गोरिदम पर चलता था:
अगर रोहन पेंटिंग बेच दे, तो मैं उसे सराहूँगी।
अगर वो पाँच किलो घटा ले, तो मैं ज्यादा स्नेही हूँगी।
अगर वो खाना बनाते हुए गुनगुनाना बंद करे, तो मैं उसके साथ बैठूँगी।
बारह साल तक वे उसे ड्राफ्ट की तरह एडिट करती रहीं।